उत्तर प्रदेश अब तेजी से देश के प्रमुख एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। प्रदेश में 22 एक्सप्रेसवे का व्यापक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिसमें ग्रीनफील्ड और कनेक्टिंग लिंक परियोजनाएं भी शामिल हैं।
इसी क्रम में गंगा एक्सप्रेसवे, लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे और गाजीपुर–बलिया एक्सप्रेसवे को जल्द ही आम लोगों के लिए शुरू करने की तैयारी है। इन मार्गों के चालू होते ही दिल्ली से पूर्वांचल तक की यात्रा न केवल कम समय में पूरी होगी, बल्कि सफर पहले से कहीं ज्यादा सुगम और आरामदायक बन जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे
मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश की सबसे अहम और महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में गिना जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज सहित कई प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ेगा।
मेन कैरिजवे का 96 प्रतिशत से ज्यादा निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि FASTag आधारित टोल सिस्टम का ट्रायल भी सफल बताया जा रहा है। उम्मीद है कि मार्च तक इसे पूरी तरह आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। इसके शुरू होते ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वांचल तक की दूरी और यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे
करीब 63 किलोमीटर लंबा लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) 6-लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जिसे भविष्य में 8 लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसमें लगभग 18–19 किलोमीटर का एलिवेटेड हिस्सा बनाया गया है, जो इसे प्रदेश के सबसे लंबे एलिवेटेड एक्सप्रेसवे में शामिल करता है।
फिलहाल लखनऊ से कानपुर पहुंचने में 2.5 से 3 घंटे तक का समय लग जाता है, लेकिन एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यही सफर महज 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को मार्च 2026 के अंत या अप्रैल तक चालू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे
करीब 750 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित गोरखपुर–शामली एक्सप्रेसवे प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है। यह 22 जिलों से होकर गुजरेगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वांचल से जोड़ेगा।
परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ रही है। निर्माण कार्य 2026–27 के दौरान शुरू होने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्य के सड़क नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी।