US-Mexico Water Deal: डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद अमेरिका और मेक्सिको के बीच लंबे समय से चला आ रहा जल विवाद आखिरकार सुलझ गया है। ट्रंप ने साफ कर दिया था कि यदि मेक्सिको जल आपूर्ति में देरी करता है, तो उसके उत्पादों पर 5% का अतिरिक्त टैरिफ थोप दिया जाएगा। इस आर्थिक दबाव का असर यह हुआ कि कई महीनों से अटकी बातचीत अब एक ठोस समझौते में बदल गई है। इस नई डील के मुताबिक, मेक्सिको अब हर साल एक निश्चित मात्रा में अमेरिका को पानी की सप्लाई करेगा, जिससे भविष्य में पैदा होने वाली किसी भी अनिश्चितता पर विराम लग गया है। अमेरिका और मेक्सिको के बीच हुए इस नए जल समझौते की शर्तें अब साफ हो गई हैं। इस डील के तहत मेक्सिको ने अगले पांच सालों के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी ली है।
समझौते की मुख्य शर्तें: मेक्सिको ने वादा किया है कि वह वर्तमान पांच साल के चक्र के दौरान हर साल कम से कम 3.5 लाख एकड़-फुट पानी अमेरिका को सप्लाई करेगा। आसान शब्दों में समझें तो ‘एकड़-फुट’ पानी मापने की एक इकाई है। इसका मतलब है इतनी मात्रा में पानी, जो एक एकड़ जमीन को एक फुट की गहराई तक पूरी तरह भर दे।
1944 की संधि और विवाद की जड़: क्यों जरूरी हुआ नया बदलाव?
पुराने समझौते में सबसे बड़ी समस्या पानी की मात्रा नहीं, बल्कि उसके देने के तरीके (Timing) को लेकर थी। 1944 की जल संधि के मुताबिक, मेक्सिको को 5 साल के एक ब्लॉक में कुल 17.5 लाख एकड़-फुट पानी देना होता था। गणित के हिसाब से यह सालाना 3.5 लाख एकड़-फुट ही बैठता है, लेकिन इसमें एक बड़ा ‘लूपहोल’ था।
मेक्सिको की जमीनी हकीकत:
सूखे की मार: मेक्सिको के उत्तरी इलाकों में जलस्तर काफी नीचे चला गया है, जिससे स्थानीय जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
किसानों का संकट: सीमावर्ती राज्य तामाउलिपास (Tamaulipas) के हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहाँ के किसानों का दर्द है कि उनके पास खुद की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचा है।
अनिश्चित भविष्य: पानी की भारी किल्लत के चलते कई किसानों ने इस सीजन में फसल की बुवाई तक नहीं की है। ऐसे में अमेरिका को पानी देने की मजबूरी मेक्सिको के कृषि क्षेत्र को बड़े संकट में डाल सकती है।