सोमवार, 23 फरवरी को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में 600 अंकों से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी 50 भी 25,750 के स्तर को पार कर गया।
बाजार में निवेशकों की ओर से जमकर खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक तेज रफ्तार से ऊपर चढ़े। आइए समझते हैं कि इस उछाल के पीछे कौन-से अहम कारण रहे।
1. अमेरिका से आई खबर ने बढ़ाया बाजार का भरोसा
वैश्विक बाजार से आई एक अहम खबर ने घरेलू शेयर बाजार की धारणा को मजबूती दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Supreme Court of the United States ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए आयात शुल्क को रद्द करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद यूरोप और अमेरिका के बाजारों में सकारात्मक रुख देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक मांग और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को राहत का संकेत मिला है। हालांकि बाद में ट्रंप ने टैरिफ दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की घोषणा की, फिर भी निवेशकों का भरोसा बना रहा।
इसी सकारात्मक माहौल का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और टेक्सटाइल व निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में 2 से 8 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।
2. वैश्विक बाजारों की मजबूती से मिला सहारा
दुनियाभर के शेयर बाजारों में आई तेजी का असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। एशियाई बाजारों में खासकर दक्षिण कोरिया का KOSPI करीब 1.5 फीसदी चढ़ गया। वहीं, शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जिससे निवेशकों का मनोबल मजबूत हुआ।
हालांकि चीन और जापान में अवकाश के कारण वहां के बाजार बंद रहे, लेकिन बाकी प्रमुख बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने घरेलू बाजार को मजबूती प्रदान की।
3. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल के दामों में गिरावट देखने को मिली, जिसने बाजार की धारणा को सहारा दिया। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता के तीसरे दौर तक पहुंचने की संभावना ने भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत दिए हैं। इससे वैश्विक अनिश्चितता घटने की उम्मीद जताई जा रही है।
इस दौरान Brent Crude Futures करीब 75 सेंट यानी 1.05 फीसदी गिरकर 71.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है। तेल सस्ता होने से महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था को राहत मिलने की संभावना रहती है।