तेल-अवीव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तेल-अवीव पहुंचने से ठीक पहले अमेरिका ने इजरायल में पहली बार अपना एफ-22 फाइटर जेट तैनात किया है। इस कदम के बाद ईरान को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह तैनाती एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा के दौरान किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। माना जा रहा है कि उनकी भारत वापसी के बाद स्थिति बदल सकती है और ईरान के खिलाफ कार्रवाई की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिका का परमाणु शक्ति से संचालित विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford भी इजरायल के नजदीक पहुंच चुका है। इसे दुनिया के सबसे बड़े और अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर्स में गिना जाता है। इसकी तैनाती के बाद क्षेत्र में सैन्य हलचल और तेज हो गई है।
इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर हैं। वह आज दोपहर तक तेल-अवीव पहुंचेंगे, जहां कई आधिकारिक कार्यक्रमों और द्विपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस यात्रा के दौरान भारत और इजरायल के बीच अहम रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री गुरुवार को भारत लौटेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैयारियां किसी बड़े संकेत की ओर इशारा कर रही हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की भारत वापसी के बाद क्षेत्रीय स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और बड़ी संख्या में सैनिकों की मौजूदगी ने ईरान को लेकर आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर किसी संभावित कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।
इतिहास में पहली बार अमेरिका का चौंकाने वाला कदम
बुधवार को इजरायल में अमेरिका के 11 F-22 Raptor लड़ाकू विमान उतारे गए। इस तैनाती को बेहद अहम माना जा रहा है। दरअसल, यह पहला मौका है जब अमेरिका ने किसी संयुक्त सैन्य अभ्यास या नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम के बजाय सीधे परिचालन और संभावित युद्ध मिशन के उद्देश्य से इजरायली जमीन पर अपने अत्याधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा हालात को लेकर कई नए संकेत मिल रहे हैं और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इसे एक बड़ी रणनीतिक कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।