ओला इलेक्ट्रिक के संस्थापक Bhavish Aggarwal को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दक्षिण गोवा के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उनके खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह कदम उस उपभोक्ता शिकायत से जुड़े मामले में उठाया गया, जिसमें नोटिस भेजे जाने के बावजूद वह आयोग के सामने पेश नहीं हुए।
रिपोर्ट्स के अनुसार, आयोग ने बेंगलुरु पुलिस को निर्देश दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हिरासत में लेकर 23 फरवरी सुबह 10:30 बजे आयोग के समक्ष पेश किया जाए। हालांकि यह बेलेबल वारंट है, इसलिए 1.47 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानतदार के आधार पर रिहाई संभव है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद गोवा निवासी प्रीतेश चंद्रकांत घड़ी की शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने अगस्त 2023 में खरीदे गए Ola S1 Pro Second Gen (कीमत लगभग 1.47 लाख रुपये) को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की। शिकायत के मुताबिक, खरीद के कुछ ही समय बाद स्कूटर के मोटर से असामान्य आवाज आने लगी और टचस्क्रीन में भी खराबी आने लगी। उपभोक्ता का कहना है कि उन्होंने वाहन को गोवा के वास्को स्थित डीलर के पास मरम्मत के लिए जमा कराया, लेकिन लंबे समय तक उन्हें स्कूटर की स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली।
उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी से कई बार संपर्क करने के बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अतिरिक्त शुल्क लेकर सर्विस किए जाने के बाद भी समस्या दूर नहीं हुई। आखिरकार, परेशान होकर उन्होंने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।
जनवरी की सुनवाई में क्या हुआ?
रिपोर्ट्स के अनुसार, 20 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान आयोग ने कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने कहा कि चूंकि वाहन की मौजूदा स्थिति और उसका ठिकाना स्पष्ट नहीं है, इसलिए Bhavish Aggarwal को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देना चाहिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह बताया जाए कि संबंधित वाहन इस समय कहां है और उपभोक्ता के बार-बार अनुरोध के बावजूद उसे अब तक क्यों नहीं लौटाया गया।
4 फरवरी को उपस्थिति का था निर्देश
आयोग ने 4 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। तय तारीख पर पेश न होने के बाद आयोग ने 1,47,499 रुपये की राशि का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।
वारंट की तामील बेंगलुरु के संबंधित पुलिस स्टेशन के माध्यम से कराने को कहा गया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 फरवरी को निर्धारित है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला लिया जाएगा।