पड़ोसी देश भारत से प्रभावित, पाकिस्तान में ईंधन संकट के कारण नए नियम लागू

neighboring countries affected pakistan implements new rules due to fuel crisis

Sneh Sharma
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मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और तेल सप्लाई में बाधा आने का असर अब पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। खासतौर पर भारत के पड़ोसी देशों—श्रीलंका, पाकिस्तान और बांग्लादेश—में ईंधन संकट गहराता जा रहा है। तेल की बढ़ती कीमतें, सप्लाई में हो रही देरी और बढ़ते खर्च ने इन देशों की अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है।

श्रीलंका में 4-दिन का वर्किंग वीक

आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका ने ईंधन बचाने के लिए कठोर कदम उठाए हैं। सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 4-दिन का वर्किंग वीक लागू किया है ताकि पेट्रोल और डीजल की खपत कम हो सके। इसके साथ ही QR कोड आधारित राशनिंग सिस्टम शुरू किया गया है, जिसके तहत हर वाहन को सीमित मात्रा में ही ईंधन मिलेगा। सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दी जा रही है और निजी वाहनों पर नियंत्रण बढ़ाया गया है।

बांग्लादेश में कड़े नियम

बांग्लादेश ने खर्च को कम करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। सरकारी कार्यालयों के काम के घंटे घटा दिए गए हैं और एयर कंडीशनिंग के उपयोग पर रोक लगाई गई है। गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, डीजल से चलने वाले पावर प्लांट्स की क्षमता कम कर दी गई है, जिससे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता बढ़ाई जा रही है।

पाकिस्तान के चौंकाने वाले कदम

पाकिस्तान ने ईंधन संकट से निपटने के लिए कई सख्त फैसले किए हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान डे पर होने वाली परेड और बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। सरकारी अधिकारियों के लिए ईंधन आपूर्ति रोक दी गई है और पेट्रोल-डीजल अलाउंस में 50% तक कटौती की गई है। इसके अलावा, कई जगहों पर स्कूल और कॉलेज बंद किए गए हैं और सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है, ताकि संसाधनों की बचत हो सके।

संकट के बढ़ने के कारण

तेल सप्लाई के अहम रास्तों में बाधा और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे ईंधन आयात करने वाले देशों की लागत बढ़ गई है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह संकट लंबे समय तक चला, तो महंगाई और बढ़ सकती है और आम जनता पर इसका असर और गहरा होगा। फिलहाल, सरकारें सख्त फैसले लेकर हालात को संभालने की कोशिश कर रही हैं।

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