सियोल: उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन को सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी के सर्वोच्च पद पर अगले पांच वर्षों के लिए दोबारा चुना गया है। पार्टी प्रतिनिधियों ने देश के परमाणु शस्त्र भंडार को मजबूत करने और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने में उनकी भूमिका की सराहना की।
पार्टी कांग्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि किम आने वाले पांच साल के लिए राजनीतिक और सैन्य प्राथमिकताओं की नई रूपरेखा तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि वे पहले से विकसित उन मिसाइल प्रणालियों और परमाणु कार्यक्रम को और गति दे सकते हैं, जिन्हें अमेरिका और उसके एशियाई सहयोगियों तक पहुंचने में सक्षम बताया जाता है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी किम जोंग उन को उनके पुनर्निर्वाचन पर बधाई संदेश भेजा है।
परमाणु क्षमता बढ़ाने पर किम जोंग का जोर
उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un का मुख्य फोकस देश की परमाणु क्षमता को और मजबूत करने पर बना हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया बैठक के जरिए वे नए सैन्य लक्ष्यों का संकेत दे सकते हैं। इनमें पारंपरिक सैन्य बलों को सुदृढ़ करना और उन्हें परमाणु क्षमताओं के साथ बेहतर समन्वय में लाना शामिल हो सकता है।
साथ ही, महामारी के बाद चीन के साथ व्यापार की बहाली और रूस को हथियार निर्यात से मिली सीमित आर्थिक गति के बीच, सरकार दोबारा ‘आर्थिक स्वावलंबन’ अभियान पर जोर दे सकती है। जन जुटाव के जरिए घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की रणनीति भी सामने आ सकती है।
उत्तर कोरिया की आधिकारिक समाचार एजेंसी Korean Central News Agency (KCNA) के मुताबिक, पार्टी की बैठक के चौथे दिन हजारों प्रतिनिधियों की “सर्वसम्मत इच्छा” के आधार पर किम जोंग उन को फिर से पार्टी का महासचिव चुना गया।
किसी भी आक्रमण का जवाब देने में सक्षम” बताई गई किम की सेना
42 वर्षीय Kim Jong Un अपने पूरे शासनकाल के दौरान पार्टी के शीर्ष पद पर बने रहे हैं। वर्ष 2016 की पार्टी कांग्रेस में उनके पद का नाम ‘फर्स्ट सेक्रेटरी’ से बदलकर ‘चेयरमैन’ किया गया था, जबकि 2021 की कांग्रेस में इसे ‘महासचिव’ कर दिया गया।
पार्टी के बयान में कहा गया कि परमाणु बलों के निर्माण के जरिए किम ने ऐसी सैन्य क्षमता विकसित की है, जो “किसी भी आक्रमण की धमकी” और “युद्ध के किसी भी स्वरूप” का सामना कर सकती है। पार्टी ने देश के भविष्य को सुरक्षित करने और जनता के “गौरव और आत्मसम्मान” को बढ़ाने का श्रेय भी उनके नेतृत्व को दिया।
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी Korean Central News Agency (KCNA) के अनुसार, रविवार को हुई बैठक में पार्टी नियमों में संशोधन भी पारित किए गए, हालांकि उनका विस्तृत विवरण तुरंत साझा नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि किम इस कांग्रेस के जरिए दक्षिण कोरिया के प्रति अपनी सख्त नीति को और स्पष्ट कर सकते हैं, साथ ही पार्टी नियमों में बदलाव कर अंतर-कोरियाई संबंधों को दो “शत्रुतापूर्ण” देशों के रूप में परिभाषित करने की दिशा में कदम उठा सकते हैं।
अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया का बढ़ता तनाव
उत्तर कोरिया और अमेरिका के रिश्तों में सबसे ज्यादा तल्खी Kim Jong Un और Donald Trump के कार्यकाल के दौरान देखने को मिली। वर्ष 2019 में दोनों नेताओं के बीच हुई शिखर वार्ता बेनतीजा रहने के बाद प्योंगयांग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ सार्थक कूटनीतिक बातचीत को रोक दिया।
उस समय विवाद का मुख्य कारण यह था कि प्रतिबंधों में राहत के बदले उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कितनी कटौती करेगा। समझौता न हो पाने के बाद वार्ता प्रक्रिया ठप हो गई।
इसके बाद किम प्रशासन ने वॉशिंगटन की ओर से आए संवाद प्रस्तावों को भी ठुकराया। साथ ही, किम ने यह संकेत दिया कि उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण को बातचीत की पूर्व शर्त बनाने की अमेरिकी मांग को छोड़ा जाना चाहिए।
अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया का बढ़ता तनाव
उत्तर कोरिया और अमेरिका के रिश्तों में सबसे ज्यादा तल्खी Kim Jong Un और Donald Trump के कार्यकाल के दौरान देखने को मिली। वर्ष 2019 में दोनों नेताओं के बीच हुई शिखर वार्ता बेनतीजा रहने के बाद प्योंगयांग ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ सार्थक कूटनीतिक बातचीत को रोक दिया।
उस समय विवाद का मुख्य कारण यह था कि प्रतिबंधों में राहत के बदले उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कितनी कटौती करेगा। समझौता न हो पाने के बाद वार्ता प्रक्रिया ठप हो गई।
इसके बाद किम प्रशासन ने वॉशिंगटन की ओर से आए संवाद प्रस्तावों को भी ठुकराया। साथ ही, किम ने यह संकेत दिया कि उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण को बातचीत की पूर्व शर्त बनाने की अमेरिकी मांग को छोड़ा जाना चाहिए।