बजट 2026 से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे नौकरीपेशा वर्ग को एक के बाद एक कई झटके लग रहे हैं। वित्त मंत्री द्वारा बजट में आयकर (Income Tax) को लेकर कोई बड़ी राहत न दिए जाने के बाद, अब कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) से जुड़ी एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। इस बार आपके पीएफ (PF) खाते पर मिलने वाली ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। जहाँ एक तरफ मिडिल क्लास बजट में किसी बड़े ऐलान की उम्मीद कर रहा था, वहीं अब बचत की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली योजना पर भी ‘कैंची’ चलने की तैयारी है।
पीएफ खाताधारकों की ब्याज दर
करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए मार्च का पहला हफ्ता बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की 239वीं सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक मार्च की शुरुआत में होने जा रही है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 के लिए नई ब्याज दरों पर मुहर लगेगी।
चुनावी राज्यों का गणित
इस साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इतिहास गवाह है कि चुनावी माहौल में सरकारें मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा वोटरों को नाराज करने वाले फैसलों से बचती हैं।
सब्सक्राइबर्स में भारी उछाल
भारत में औपचारिक रोजगार (Formal Employment) बढ़ने के साथ ईपीएफओ (EPFO) के सदस्यों की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, हर महीने लगभग 20 लाख से ज्यादा नए और पुराने सदस्य नेट पेरोल में जुड़ रहे हैं। अकेले जुलाई 2025 में 21 लाख से अधिक सदस्य जुड़े थे।
बदलाव की वजहें:
पेमेंट लोड: ज्यादा खाताधारकों को अधिक ब्याज देने के लिए ईपीएफओ को अपनी निवेश कमाई (जैसे शेयर बाजार और बॉन्ड्स) से पर्याप्त रिटर्न हासिल करना होता है।
भविष्य की सुरक्षा:वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए ब्याज दर में मामूली कटौती का सुझाव दिया जाता है ताकि फंड कभी घाटे में न जाए।वर्तमान स्थिति: फिलहाल ब्याज दर 8.25% है। चर्चा है कि इसे अगले वित्त वर्ष के लिए 8% से 8.20% के बीच रखा जा सकता है।