क्रिप्टो बाजार के लिए पिछला एक हफ्ता किसी बुरे सपने जैसा रहा है, जहां निवेशकों ने अपनी आंखों के सामने भारी भरकम दौलत डूबती देखी। कॉइनगेको (CoinGecko) के डेटा के अनुसार, 29 जनवरी के बाद से पूरे मार्केट की वैल्यू में करीब 467.6 अरब डॉलर (लगभग आधा ट्रिलियन डॉलर) की भारी गिरावट आई है। बाजार में मची इस खलबली का मुख्य चेहरा बिटकॉइन रहा। हालांकि बुधवार को इसमें 1.31% की हल्की बढ़त देखी गई और यह 76,681.72 डॉलर पर कारोबार करता दिखा, लेकिन इसकी पिछली गिरावट डराने वाली थी। मंगलवार को बिटकॉइन लुढ़ककर 72,877 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया था। यह पिछले 15 महीनों का इसका सबसे निचला स्तर है।
रिकॉर्ड स्तर से बड़ी गिरावट
बिटकॉइन की कीमतों में आ रही गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक बिटकॉइन अपनी वैल्यू का लगभग 13% हिस्सा गंवा चुका है। अगर इसकी तुलना अक्टूबर 2025 में दर्ज किए गए इसके शिखर (All-time high) से करें, तो यह अपने 1,26,000 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से करीब 39% नीचे आ चुका है। महत्वपूर्ण बात यह है कि गिरावट का यह दौर केवल क्रिप्टो मार्केट तक ही सीमित नहीं है। ब्लूमबर्ग और लाइवमिंट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे वैश्विक आर्थिक कारक (Macro Factors) जिम्मेदार हैं। वर्तमान में पूरी दुनिया के वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है, जिसका असर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर भी साफ देखा गया। हालांकि, मंगलवार को इन धातुओं में थोड़ी रिकवरी जरूर हुई, लेकिन क्रिप्टो बाजार अब भी दबाव में है।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराता तनाव
मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ती सैन्य हलचल और अमेरिका-ईरान के बीच तीखी बयानबाजी ने निवेशकों को डरा दिया है। जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, निवेशक बिटकॉइन जैसी ‘जोखिम वाली संपत्तियों’ से पैसा निकालकर डॉलर, सरकारी बॉन्ड्स या कैश जैसे सुरक्षित ठिकानों में लगाने लगते हैं। हालांकि बिटकॉइन को “डिजिटल गोल्ड” कहा जाता है, लेकिन इस संकट के समय में लोग इसे सुरक्षित मानने के बजाय एक जोखिम भरी संपत्ति की तरह तेजी से बेच रहे हैं।
2. आर्थिक दबाव और लिक्विडिटी की कमी
दुनिया भर के बाजारों में इस वक्त नकदी (Liquidity) की कमी और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सख्त मौद्रिक नीतियों के कारण बाजार में घबराहट है। जिन लोगों ने कर्ज लेकर (Leveraged Positions) बड़े निवेश किए थे, उनके सौदे तेजी से कट रहे हैं (Liquidation), जिससे बाजार की गिरावट और ज्यादा बढ़ गई है।
3. बाजार का सेंटिमेंट और पोजीशन रीसेट
बाजार के जानकारों का मानना है कि बिटकॉइन का 73,000 डॉलर के स्तर से नीचे गिरना इस बात का संकेत है कि बिकवाली का दबाव बहुत ज्यादा है। पिछले 48 घंटों में यह गिरावट किसी एक छोटी घटना की वजह से नहीं आई, बल्कि यह पूरे बाजार में फैली घबराहट और पुराने निवेशों के ‘रीसेट’ होने का नतीजा है। सरल शब्दों में कहें तो, निवेशक इस समय मुनाफे से ज्यादा अपनी मूल पूंजी बचाने की कोशिश में लगे हैं।