कैंसर को दुनिया की सबसे गंभीर और जटिल बीमारियों में गिना जाता है। Cancer Research UK के अनुसार, कैंसर के 200 से अधिक प्रकार पाए जाते हैं। इनका वर्गीकरण इस आधार पर किया जाता है कि बीमारी शरीर की किस तरह की कोशिकाओं से शुरू होती है।
कार्सिनोमा वह कैंसर है जो त्वचा या शरीर के अंदरूनी अंगों की परत से शुरू होता है। सारकोमा हड्डियों, मांसपेशियों, वसा और रक्त वाहिकाओं जैसे सहायक ऊतकों से उत्पन्न होता है। ल्यूकेमिया की शुरुआत रक्त बनाने वाले ऊतकों, विशेष रूप से बोन मैरो में होती है और यह सफेद रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करता है।
लिम्फोमा और मायलोमा प्रतिरक्षा तंत्र की कोशिकाओं से जुड़े कैंसर हैं। इसके अलावा, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से संबंधित कैंसर को सेंट्रल नर्वस सिस्टम कैंसर की श्रेणी में रखा जाता है।
भारत में इस समय सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कैंसर
इन मुख्य श्रेणियों के भीतर कई विशिष्ट प्रकार के कैंसर शामिल होते हैं। 9 फरवरी को प्रसारित एमएचबी बाइट्स पॉडकास्ट में रायपुर के वरिष्ठ सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. जयेश शर्मा ने मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की। करीब 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले डॉ. शर्मा के अनुसार, भारत में कैंसर के पैटर्न में बीते कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
उन्होंने बताया कि पहले महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम था और ब्रेस्ट कैंसर दूसरे स्थान पर आता था। हालांकि अब स्थिति बदल चुकी है। वर्तमान में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं के साथ-साथ पुरुषों में भी सबसे अधिक सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे बदलती जीवनशैली, बढ़ती औसत आयु और स्तनपान की अवधि में कमी जैसे कई कारक जिम्मेदार हैं।
इन कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा
मौजूदा समय में मुंह का कैंसर दूसरे स्थान पर है, जो मुख्य रूप से तंबाकू चबाने और अन्य नशे की आदतों से जुड़ा माना जाता है। तीसरे और चौथे स्थान पर सर्वाइकल कैंसर और फेफड़ों का कैंसर लगभग बराबरी पर हैं, जबकि कोलन कैंसर पांचवें स्थान पर आता है।
ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ती उम्र, मोटापा, मेनोपॉज, शारीरिक गतिविधि की कमी, शराब के सेवन और पारिवारिक इतिहास जैसे कारणों से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर जांच, नियमित स्वयं परीक्षण और मैमोग्राफी से इस बीमारी की जल्द पहचान कर जान बचाई जा सकती है।
सर्वाइकल कैंसर ज्यादातर एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) संक्रमण से जुड़ा होता है। टीकाकरण और नियमित स्क्रीनिंग के जरिए इसके खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मुंह का कैंसर धूम्रपान, गुटखा और पान मसाला जैसे तंबाकू उत्पादों के सेवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। भारत में खासतौर पर चबाने वाले तंबाकू के व्यापक इस्तेमाल को इसके बढ़ते मामलों की बड़ी वजह माना जाता है। फेफड़ों का कैंसर भी मुख्य रूप से धूम्रपान से संबंधित है।
वहीं, शहरी क्षेत्रों में कोलन कैंसर के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञ इसके पीछे कम फाइबर वाला आहार, प्रोसेस्ड मीट का अधिक सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और मेटाबॉलिक समस्याओं को जिम्मेदार मानते हैं।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कैंसर अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। इसके विकास में आनुवंशिक कारणों के साथ-साथ जीवनशैली और पर्यावरणीय कारकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। तंबाकू का सेवन, मोटापा, शराब का उपयोग, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खानपान और लंबे समय तक रहने वाली सूजन जैसी स्थितियां कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती हैं।