तेलंगाना की जांबाज एंटी-नारकोटिक्स फोर्स ‘ईगल’ (EAGLE) ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशनों में से एक को अंजाम दिया है। NCB, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर किए गए इस साझा मिशन ने भारत की जड़ों को खोखला कर रहे एक खूंखार नाइजीरियन ड्रग कार्टेल की कमर तोड़ दी है।
ऑपरेशन की अहम बातें:
इंटरस्टेट नेटवर्क का खात्मा: यह ड्रग सिंडिकेट केवल एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में फैला हुआ था। सुरक्षा बलों ने एक साथ कार्रवाई कर इसके बहु-राज्यीय नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।
ज्वाइंट स्ट्राइक: ‘ईगल’ फोर्स की सटीक रणनीति और दिल्ली पुलिस व केंद्रीय एजेंसियों के बीच जबरदस्त तालमेल ने इस बड़े भंडाफोड़ को मुमकिन बनाया।
विदेशी कनेक्शन: इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि कैसे विदेशी सिंडिकेट भारत के युवाओं को नशे के जाल में फंसाने की साजिश रच रहे थे।
नशे के सौदागरों के खिलाफ चली इस चौतरफा कार्रवाई में सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली से लेकर विशाखापत्तनम तक जाल बिछाकर इस सिंडिकेट को नेस्तनाबूद कर दिया है। दिल्ली के 20 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ गुपचुप तरीके से छापेमारी की गई, जिसमें अवैध रूप से रह रहे 50 से ज्यादा नाइजीरियाई नागरिकों को हिरासत में लिया गया।
यह ऑपरेशन केवल गिरफ्तारियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि एजेंसियों ने इस पूरे ड्रग कार्टेल की ‘जड़’ पर प्रहार किया है:
मुख्य संचालकों की धरपकड़: दिल्ली में छापेमारी के साथ-साथ पुलिस ने नोएडा, ग्वालियर और विशाखापत्तनम में भी दबिश दी। यहाँ से इस अंतरराष्ट्रीय कार्टेल को चलाने वाले मुख्य सरगनाओं और मास्टरमाइंड्स को दबोचा गया।
सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा: जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों से अपना नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था, जिसमें नोएडा और विशाखापत्तनम जैसे शहर इनके प्रमुख सप्लाई हब बने हुए थे।
बड़ी बरामदगी: इन ठिकानों से न केवल ड्रग्स, बल्कि अवैध दस्तावेज और संचार के उपकरण भी बरामद किए गए हैं, जो इस काले कारोबार के सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जाएंगे।
सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन के जरिए ड्रग सिंडिकेट की न केवल सप्लाई चेन काटी है, बल्कि उसकी आर्थिक रीढ़ पर भी गहरा प्रहार किया है। छापे के दौरान चार मुख्य ठिकानों से नशे की भारी खेप और बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया गया है।
बरामदगी और वित्तीय कार्रवाई की मुख्य बातें:
करोड़ों की ड्रग्स: पुलिस ने 5,340 एक्सटेसी पिल्स, 250 ग्राम कोकीन, 109 ग्राम हेरोइन और 250 ग्राम मेथैम्फेटामाइन जब्त की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की कीमत 3.5 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जा रही है।
बैंक खातों पर स्ट्राइक: वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सिंडिकेट से जुड़े 107 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है। इसके अलावा, जांच में 59 ऐसे ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर खुले खाते) का पता चला है जिनका इस्तेमाल पैसे के लेनदेन के लिए होता था।
दिल्ली के 16 हब्स का खुलासा: जांच एजेंसियों ने दिल्ली में उन 16 प्रमुख अड्डों (Cartel Hubs) की पहचान कर ली है, जहाँ से नशे का यह काला कारोबार संचालित किया जा रहा था।
जांच में इस ड्रग सिंडिकेट के नेटवर्क को लेकर जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह किसी छोटे दायरे में नहीं, बल्कि पूरे भारत में अपनी पैठ बना चुका था। इसकी जड़ें सैकड़ों बैंक खातों और दिल्ली की गलियों तक फैली हुई थीं।
सिंडिकेट के नेटवर्क का बड़ा खुलासा:
2000+ का क्लाइंट बेस: यह कार्टेल देश भर में 2,000 से अधिक ग्राहकों और स्थानीय तस्करों को नशे की सप्लाई कर रहा था। इसमें बड़े शहरों के हाई-प्रोफाइल लोग और छोटे पैडलर्स दोनों शामिल थे।
बैंक खातों का मायाजाल: पैसों के अवैध लेनदेन के लिए सैकड़ों ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ (गुमनाम खाते) तैयार किए गए थे। इन खातों का पूरा कंट्रोल भारत में बैठे नाइजीरियन हैंडलर्स के पास था, ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।