जयपुर | 29 मार्च 2026 । “तमसो मा ज्योतिर्गमय” यानी ‘अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें’—भारतीय संस्कृति के इस शाश्वत संदेश को गुलाबी नगर (जयपुर) में धरातल पर जीवंत होते देखा गया। आँखें ईश्वर का दिया हुआ वह सबसे अनमोल उपहार हैं, जिसके बिना यह खूबसूरत दुनिया महज एक गहरा अंधकार है। किसी के जीवन के इस अंधकार को दूर कर उसकी आँखों में फिर से रोशनी लाने का माध्यम बनने से बड़ा कोई पुण्यकर्म और आत्मिक संतोष नहीं हो सकता। इसी पावन भावना और ‘अंधत्व निवारण एवं रोकथाम’ के दृढ़ संकल्प के साथ रविवार को जयपुर में एक विशाल निःशुल्क नेत्र जाँच महाशिविर का आयोजन किया गया, जिसने समाज सेवा के क्षेत्र में एक नया और ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
सक्षम संस्था जयपुर और महेश भगवती बल्दवा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में बनीपार्क स्थित एस.एस.जी. पारीक पी.जी. महाविद्यालय के विस्तृत प्रांगण में इस एक दिवसीय महाशिविर का आयोजन किया गया। शिविर में स्वास्थ्य लाभ लेने वाले जरूरतमंदों का ऐसा भारी जनसैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। प्रातः 9:00 बजे से लेकर सायं 5:00 बजे तक अनवरत चले इस महाशिविर ने निःस्वार्थ सेवा, समर्पण और उत्कृष्ट प्रबंधन का एक ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है।

3618 जिंदगियों में सीधा बदलाव
किसी भी चिकित्सा शिविर की सफलता का पैमाना वहाँ लाभान्वित होने वाले लोगों की संख्या और उन्हें दी गई सुविधाओं की गुणवत्ता से तय होता है। इस शिविर की व्यापकता और सफलता का अंदाजा महज इसके आंकड़ों से ही लगाया जा सकता है। दिन भर चले इस महायज्ञ में कुल 3618 लोगों का निःशुल्क पंजीयन किया गया। यह संख्या अपने आप में यह दर्शाती है कि समाज में सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाओं की कितनी आवश्यकता है। जाँच के उपरांत, 3265 मरीजों को उनकी आवश्यकतानुसार निःशुल्क दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि 1682 लाभार्थियों को उनकी दृष्टि क्षमता (नंबर) के अनुसार मौके पर ही चश्मे वितरित किए गए। जिन बुजुर्गों और युवाओं को धुंधला दिखने की शिकायत थी, आँखों पर चश्मा लगते ही उनके चेहरों पर जो खुशी और संतोष की चमक थी, वह इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। इसके अतिरिक्त, मोतियाबिंद (Cataract), काला मोतिया (Glaucoma) व अन्य गंभीर नेत्र रोगों से पीड़ित 360 मरीजों को अत्याधुनिक तकनीक से ऑपरेशन के लिए रेफर किया गया है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि इन सभी 360 मरीजों का आगामी दिनों में पूर्णतः निःशुल्क और सुरक्षित ऑपरेशन सुनिश्चित किया जाएगा।
इतने वृहद स्तर के आयोजन को बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से संचालित करना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन 25 वरिष्ठ एवं ख्याति प्राप्त नेत्र रोग विशेषज्ञों (Ophthalmologists), 50 प्रशिक्षित ऑप्टोमेट्रिस्ट (Optometrists) और लगभग 250 से अधिक समर्पित कार्यकर्ताओं की फौज ने इस असंभव से दिखने वाले कार्य को संभव कर दिखाया। इन चिकित्साकर्मियों और स्वयंसेवकों ने बिना किसी थकान की परवाह किए, लगातार आठ घंटे तक अपनी निरंतर सेवाएँ दीं। मरीजों की कतारों को व्यवस्थित करने से लेकर, उनकी प्रारंभिक जाँच, डॉक्टरों द्वारा गहन परीक्षण, दवा वितरण और चश्मा पहनाने तक की पूरी प्रक्रिया को बेहद वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से अंजाम दिया गया।

‘अंत्योदय’ का साकार रूप
महाशिविर का उद्घाटन सत्र अत्यंत भव्य और गरिमामय रहा, जिसमें राजनीति, समाज सेवा और चिकित्सा जगत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ उपस्थित रहे। उनके साथ मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांत प्रचारक बाबूलाल और सक्षम संस्था के राष्ट्रीय सह-सचिव अभय परगाल ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेश भगवती बल्दवा फाउंडेशन की चेयरपर्सन भगवती बल्दवा ने की।
शिविर का विधिवत दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा, “समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक जब उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचती हैं, तभी सही मायने में ‘अंत्योदय’ का सपना साकार होता है। यही सच्ची नारायण सेवा है।” उन्होंने सक्षम संस्था और बल्दवा फाउंडेशन के इस भगीरथ प्रयास की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे पूरे देश के लिए वंदनीय बताया। राठौड़ ने ‘सक्षम’ के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि, “सक्षम आज केवल एक संस्था मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों के समग्र उत्थान का एक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुकी है। राजस्थान में रामदेवरा मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की सेवार्थ सक्षम द्वारा जो विशाल नेत्र महाकुंभ लगाया जाता है, वह विश्व पटल पर सेवा का एक अनुपम उदाहरण है। इसके अलावा देश के हर कोने में सक्षम के प्रकल्प चल रहे हैं, जो भटके हुए समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा दे रहे हैं।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं महेश भगवती बल्दवा फाउंडेशन की चेयरपर्सन भगवती बल्दवा ने अपने भावपूर्ण संबोधन में कहा कि सेवा का मार्ग ही जीवन का सबसे सच्चा मार्ग है। उन्होंने कहा, “जब हम किसी बेबस व्यक्ति के जीवन में फिर से रोशनी लाने का माध्यम बनते हैं, तो उससे बड़ा आत्मिक संतोष और ईश्वर की कृपा कुछ और नहीं हो सकती। हमारा फाउंडेशन हमेशा से ही समाज के वंचित वर्गों के लिए कार्य करता रहा है और अपने इसी सामाजिक दायित्व को निभाते हुए आज हम सक्षम संस्था के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। अंधत्व निवारण एवं रोकथाम के इस पुनीत महायज्ञ में सम्मिलित होना हमारे लिए सौभाग्य की बात है।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी महेश बल्दवा और हवामहल विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने भी विशेष रूप से उपस्थित होकर मरीजों का हाल-चाल जाना और पूरी चिकित्सा टीम व कार्यकर्ताओं का भारी उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में सभी अतिथियों, मुख्य वक्ताओं और आयोजकों ने संयुक्त रूप से समाज को एक कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया।
इतने बड़े जनसैलाब को संभालने के लिए एक विशाल और सर्वसुविधायुक्त परिसर की आवश्यकता थी। इस महाशिविर के लिए अपना विशाल परिसर सहर्ष उपलब्ध कराने और सभी आधारभूत व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने में एस.एस.जी. पारीक पी.जी. कॉलेज के सचिव लक्ष्मीकांत पारीक एवं उनकी समस्त फैकल्टी का बड़ा सहयोग रहा। इसके साथ ही, शंकरा ग्रुप ऑफ कॉलेज के निदेशक संत कुमार ने भी इस मानवीय पहल में अपना महत्वपूर्ण सपोर्ट प्रदान किया।
कोई भी बड़ा आयोजन तब तक सफल नहीं हो सकता जब तक उसके पीछे काम करने वाली टीम का विजन और मेहनत स्पष्ट न हो। इस आयोजन को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने और इसे ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का पूरा श्रेय आयोजन समिति को जाता है।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. अशोक सिंह सोलंकी और सक्षम संस्था के प्रदेश सचिव डॉ. कुलदीप मिश्रा के साथ ही कमल कुमार, डॉ. महावीर सैनी, डॉ. राजेश गोयल, डॉ. मधु गोयल, डॉ. दीपक माहेश्वरी, मेजर नीति बंसल, प्रोफेसर एन.एम. शर्मा और प्रमिला दुबे के संगठनात्मक कौशल, चिकित्सकीय विशेषज्ञता और निस्वार्थ सेवाभाव के कारण ही 3618 लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट सकी। इसके साथ ही, सहित संस्था के सभी पदाधिकारियों और सैकड़ों जमीनी कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया। गुलाबी नगर में आयोजित यह निःशुल्क नेत्र जाँच महाशिविर केवल एक चिकित्सा आयोजन नहीं था, बल्कि यह समाज के उस तबके के लिए एक ‘उम्मीद की किरण’ था, जो आर्थिक तंगी या जागरूकता के अभाव में अपनी आँखों की रोशनी खोने को मजबूर हैं।

