पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने आम लोगों को राहत भरी खबर दी है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि भारत की ऊर्जा स्थिति पहले से अधिक मजबूत है। देश के पास तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति को लेकर किसी तरह की तत्काल चिंता की स्थिति नहीं है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में संकेत मिला है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति पहले की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है। कुछ समय पहले एलपीजी के भंडार को लेकर चिंता जताई जा रही थी, लेकिन अब हालात में काफी सुधार आ गया है। ऐसे में सरकार को विश्वास है कि अगर वैश्विक स्तर पर कोई संकट पैदा होता भी है, तो उसका असर भारत पर सीमित ही रहेगा।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का रुख साफ
सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक आम लोगों को राहत देने के लिए ईंधन के दाम स्थिर बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
दरअसल, हाल के दिनों में विपक्ष की ओर से यह आरोप लगाया गया था कि अंतरराष्ट्रीय हालात के चलते पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इस पर सरकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
सरकार ने दोहराया कि फिलहाल इन दोनों ईंधनों की कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी का कोई फैसला नहीं लिया गया है।
एलपीजी कीमतों को लेकर भी सरकार का स्पष्टीकरण
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दिए गए बयान को एलपीजी के साथ जोड़कर देखना सही नहीं है। उनके मुताबिक एलपीजी की कीमतों को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, वे भ्रामक हैं।
सरकार का कहना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग है। सूत्रों के अनुसार एलपीजी को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का मौजूदा हालात से कोई सीधा संबंध नहीं है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता घटी
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल मार्ग को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे हालात को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बदलाव किया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत ने अब कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में विविधता बढ़ा दी है। पहले जहां करीब 60 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज जलडमरूमध्य के अलावा अन्य रास्तों और देशों से आता था, अब यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि भारत की इस संवेदनशील समुद्री मार्ग पर निर्भरता पहले की तुलना में कम हो गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि देश में एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। कई देशों ने भारत को एलएनजी सप्लाई करने की पेशकश भी की है, जिससे आने वाले समय में गैस की उपलब्धता को लेकर किसी बड़ी परेशानी की संभावना कम मानी जा रही है।
इसके अलावा कतर ने भी भारत को भरोसा दिया है कि जैसे ही सप्लाई से जुड़े रास्ते सामान्य होंगे, वह भारत को गैस की आपूर्ति फिर से शुरू कर देगा। इससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर स्थिति और अधिक स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है।