मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी टकराव ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, वहीं ईरान भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हमले कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान खाड़ी और अरब देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टारगेट कर रहा है।
इस बीच अमेरिका ने दावा किया है कि ईरानी नौसेना को भारी नुकसान पहुंचा है, जबकि इजरायल का कहना है कि उसने ईरान के हवाई क्षेत्र पर बढ़त बना ली है। युद्ध जैसे हालात के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पाइसजेट ने फंसे हुए भारतीयों को वापस लाने के लिए 14 विशेष उड़ानें चलाने का फैसला किया है।
ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद वहां के अगले सर्वोच्च नेता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी न्यूज वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के नए सर्वोच्च नेता के चयन की प्रक्रिया में अमेरिका को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को सर्वोच्च नेता बनाए जाने का फैसला स्वीकार्य नहीं होगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान की सत्ता को लेकर आगे क्या फैसला होता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
वहीं, क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने खाड़ी देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारत सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे मौजूदा हालात को देखते हुए सतर्क रहें और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। परामर्श में यह भी कहा गया है कि विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौजूदा स्थिति पर उच्च स्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी के साथ विभिन्न देशों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने की प्रक्रिया भी जारी है।
जंग के पहले 100 घंटों में अमेरिका को भारी नुकसान
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के पहले 100 घंटों में ही अमेरिका को करीब 3.7 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। औसतन देखें तो यह खर्च प्रतिदिन लगभग 891.4 मिलियन डॉलर के बराबर बैठता है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ दोनों ने संकेत दिए हैं कि यह संघर्ष लंबा चल सकता है और आने वाले हफ्तों तक जारी रह सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि अगर जंग जारी रहती है तो अमेरिका को आर्थिक और सैन्य स्तर पर और भी बड़ा खर्च उठाना पड़ सकता है।