Stock Market News: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के कारोबारी सत्र में बाजार में जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
दोपहर करीब 1 बजे BSE Sensex 1,579 अंकों तक फिसल गया था, जबकि NIFTY 50 में 478 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, कारोबार के अंतिम घंटों में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद सेंसेक्स 1,048 अंक नीचे बंद हुआ। वहीं निफ्टी 24,900 के स्तर से नीचे आकर दिन का कारोबार समाप्त किया।
बाजार में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर बिकवाली हावी रही, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई। अब सवाल है कि आखिर इस तेज गिरावट के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार रहे — आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
1. पश्चिम एशिया में बढ़ती अनिश्चितता
ईरान और इजरायल के बीच गहराते तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की धारणा को कमजोर कर दिया है। हालिया सैन्य कार्रवाई और उसके जवाब में हुए हमलों से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है। जानकारों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा चलता है, तो ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
तनाव के माहौल में वैश्विक तेल बेंचमार्क Brent Crude की कीमतों में 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और भाव 82.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा दबाव उन कंपनियों पर पड़ता है जिनकी लागत संरचना क्रूड पर निर्भर करती है। खासकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, पेंट उद्योग और एविएशन सेक्टर के शेयरों में बिकवाली देखी गई, क्योंकि ईंधन महंगा होने से इनके मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।
2. विदेशी निवेशकों की बिकवाली
27 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 7,536.4 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। लगातार पूंजी निकासी से बाजार को जरूरी सपोर्ट नहीं मिल पाया, जिससे गिरावट और गहरी हो गई। विदेशी निवेशकों की बिकवाली अक्सर बाजार की धारणा पर सीधा असर डालती है और बड़े शेयरों में दबाव बढ़ा देती है।
3. India VIX में तेज उछाल
बाजार की घबराहट वोलैटिलिटी इंडेक्स में भी साफ नजर आई। India VIX करीब 15 फीसदी उछलकर 15.78 के स्तर पर पहुंच गया। VIX में तेजी इस बात का संकेत है कि निवेशक आने वाले सत्रों में ज्यादा उतार-चढ़ाव की आशंका जता रहे हैं। बढ़ती अनिश्चितता के बीच ट्रेडर्स सतर्क रुख अपना रहे हैं।
4. रुपये पर दबाव
मुद्रा बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिसलकर 91.23 पर खुला। इससे पहले शुक्रवार को यह 17 पैसे गिरकर 91.08 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
रुपये पर दबाव की प्रमुख वजहें रहीं—
- कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
- विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
- वैश्विक स्तर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ता रुझान
- इन सभी कारकों ने मिलकर बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की तेज होती कीमतें, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोरी—इन सभी ने मिलकर भारतीय शेयर बाजार की धारणा को झटका दिया है। निवेशकों के बीच अनिश्चितता बढ़ी है, जिसके चलते जोखिम लेने की इच्छा कम होती दिख रही है।
अब आगे बाजार की चाल काफी हद तक दो बातों पर टिकी रहेगी—पहली, क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात कितनी जल्दी सामान्य होते हैं; और दूसरी, वैश्विक तेल कीमतों की दिशा क्या रहती है। यदि तनाव कम होता है और क्रूड में नरमी आती है, तो बाजार को कुछ राहत मिल सकती है, वरना उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।