पाकिस्तान का रवैया एक बार फिर वही पुराना नज़र आ रहा है। गैरज़रूरी बयानबाज़ी और उलटे-सीधे तर्क वहां की हुकूमत की पहचान बन चुके हैं। अपने ही फैसलों पर कायम न रह पाना और बाद में सफाई देने के लिए बेबुनियाद बातें करना मानो उनकी आदत में शुमार हो गया है। अब ताज़ा विवाद भी कुछ ऐसा ही है। दरअसल, पाकिस्तान ने कई हफ्तों तक ड्रामा किया—कभी बॉयकॉट की धमकी दी तो कभी अलग-अलग शर्तें रखीं। लेकिन आखिरकार 15 फरवरी को भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच खेलने पर सहमति जता दी। सब कुछ सामान्य लग ही रहा था कि तभी इस पूरे मामले में एक नया बखेड़ा खड़ा हो गया।
भारत के खिलाफ मैच खेलने की सहमति देने के बाद अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के चेयरमैन मोहसिन नकवी ने आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का नाम उछालकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि नकवी पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि न तो वह, न पाकिस्तान सरकार और न ही फील्ड मार्शल आसिम मुनीर आईसीसी की किसी चेतावनी से डरते हैं।
नकवी ने कहा, “मुझे न भारत की धमकियों से डर लगता है और न ही आईसीसी से। पाकिस्तान सरकार भी किसी दबाव में नहीं है। जहां तक फील्ड मार्शल सैयद आसिम मुनीर का सवाल है, उनके बारे में आप पहले से जानते हैं—वह कभी डरते नहीं हैं।”
फील्ड मार्शल बने आसिम मुनीर
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इन दिनों पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाली शख्सियतों में शामिल हैं। मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनका नाम लगातार सुर्खियों में रहा। इस ऑपरेशन के तहत जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव काफी बढ़ गया था।
इसी घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान सरकार ने 20 मई 2025 को जनरल आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत करने का फैसला लिया। अयूब खान के बाद वह पाकिस्तान के इतिहास में दूसरे व्यक्ति बने, जिन्हें यह सर्वोच्च सैन्य रैंक मिली। पाकिस्तानी हुकूमत और सैन्य अधिकारी मुनीर के नेतृत्व को देश की मजबूती और सुरक्षा का प्रतीक बताते रहे हैं। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान की स्थिति क्या रही, यह पूरी दुनिया ने देखा।
ऐसे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने लिया यू-टर्न
गौरतलब है कि शुरुआत में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और पाकिस्तान सरकार ने भारत के खिलाफ मैच न खेलने की खुली धमकी दी थी। लेकिन बाद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में श्रीलंका, यूएई और बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्डों के साथ-साथ आईसीसी से हुई बातचीत के बाद रुख बदल गया। सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि यह फैसला मित्र देशों के आग्रह पर लिया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भावना और इसकी निरंतरता बनी रहे।
आईसीसी ने भी लाहौर में पीसीबी और बीसीबी अधिकारियों के साथ हुई बैठकों को सकारात्मक करार दिया और स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से जुड़े बड़े विवाद के बावजूद किसी तरह की पेनल्टी नहीं लगाई जाएगी। इस तरह पाकिस्तान ने आखिरकार मैच खेलने पर सहमति जता दी, लेकिन मोहसिन नकवी के ताज़ा बयान ने पूरे मामले को एक बार फिर राजनीतिक रंग दे दिया।