किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना मकसद नहीं था: नीरज पांडे के बाद मनोज बाजपेयी का बयान

manoj Bajpayee clarifies after neeraj pandey over controversy

Sneh Sharma
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मनोज बाजपेयी अभिनीत यह फिल्म उस समय से चर्चा में है, जब नेटफ्लिक्स के ‘नेक्स्ट ऑन नेटफ्लिक्स 2026’ इवेंट में मेकर्स ने इसका पहला लुक पेश किया था। हालांकि, रिलीज से पहले ही फिल्म का नाम विवादों में घिर गया। विवाद की वजह टाइटल में ‘पंडित’ (जिसका अर्थ पुजारी या धार्मिक विद्वान होता है) शब्द को ‘घूसखोर’ जैसे नकारात्मक संदर्भ के साथ जोड़ा जाना है, जिस पर कई समुदायों ने आपत्ति जताई है।

गुरुवार को फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई। इसके साथ ही मामला तब और गंभीर हो गया, जब FMC ने टाइटल के कथित अनधिकृत उपयोग को लेकर मेकर्स और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स को नोटिस जारी किया।

इसके अलावा लखनऊ में फिल्म के निर्माताओं के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का टाइटल और कंटेंट धार्मिक और जातिगत भावनाओं को आहत करता है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है। हालात को देखते हुए जहां मेकर्स ने अपनी ओर से सफाई दी, वहीं फिल्म के मुख्य अभिनेता मनोज बाजपेयी को भी सामने आकर अपना पक्ष रखना पड़ा।

मनोज बाजपेयी ने दी सफाई

मनोज बाजपेयी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए एक लंबा बयान साझा करते हुए अपनी बात रखी। अभिनेता ने कहा कि वह लोगों द्वारा जताई गई भावनाओं और चिंताओं का सम्मान करते हैं और उन्हें गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने लिखा कि जब किसी काम से कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो उस पर रुककर सुनना और समझना जरूरी हो जाता है।
मनोज बाजपेयी ने आगे कहा कि एक अभिनेता के रूप में वह किसी भी फिल्म में अपने किरदार और उसकी कहानी के माध्यम से जुड़ते हैं। उनके लिए यह फिल्म एक ऐसे इंसान की कहानी है, जो कमजोर है और अपनी आत्म-पहचान की तलाश में है। उन्होंने साफ किया कि इसका उद्देश्य किसी भी समुदाय को लेकर कोई टिप्पणी करना नहीं था।

नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा कि उन्होंने हमेशा देखा है कि नीरज पांडे अपनी फिल्मों पर बेहद गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ काम करते हैं। लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फिल्म के निर्माताओं ने प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला भी लिया है।

नीरज पांडे ने भी दी सफाई

इससे पहले नीरज पांडे ने भी इंस्टाग्राम पर एक लंबा नोट साझा कर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी भी जाति विशेष की भावनाओं को आहत करने की नहीं थी। अपने पोस्ट में नीरज पांडे ने लिखा कि उनकी फिल्म एक काल्पनिक कॉप ड्रामा है और इसमें “पंडित” शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल के नाम के रूप में किया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि फिल्म की कहानी पूरी तरह एक व्यक्ति के कार्यों और उसके फैसलों पर केंद्रित है और इसका उद्देश्य किसी भी जाति, धर्म या समुदाय को दर्शाना या उस पर टिप्पणी करना नहीं है। एक फिल्ममेकर के तौर पर उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करते हैं, ताकि सोच-समझकर और सम्मानजनक तरीके से कहानियां पेश की जा सकें।

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